मीसा बंदियों की सम्मान निधि पर राजनीति गर्म.

मीसा बंदियों की सम्मान निधि पर राजनीति गर्म.


रायपुर। 24जनवरी2020.घत्तीसगढ़ में मीसा बंदियों के सम्माननिधि को लेकर राजनीति गर्म हो गई है। सत्तादल और भाजपा के मध्य वाक्युद्ध शुरू हो गया है क्योंकि राज्य सरकार ने मीसा बदियों को मिलने बाली प्रति माह सम्मान राशी को बंद करने की विधिवत आधिसुचना जारी करवा दी है।
  राज्य सरकार द्वारा 5,अगस्त2008को जारी अधिसूचना के अनुसार यह प्राबघान  किया गया था कि भारत में घोषित आपातकाल के दौर25जून1975सेमार्च1977की काल अवधि के दौरान छत्तीसगढ़ के राजनीतिक या सामाजिक कारणो से मीसा डीआईआर के अधीन निरूद्ध व्याक्तियों को सहायता देने के लिए यह. नियम बनाया था।
        आपातकाल के दौरान धत्तीसगढ़ के विभिन्न जेलो में बंद रहे लगभग तीन सौ मीसा बंदियों को सम्मान निधि.मिलता था,जो वंद कर दी गई ।बर्तमान वघेल सरकार ने 2008के उस नियम को ही निरस्त कर दिया है ,जिसकी अथिसूचना 23जनवरी2020को राजपत्र में भी प्रकाशित कर दी गई है।
     पूर्व भाजपा सरकार ने वर्ष2008मे मीसा बंदियों को सम्मान निधि देने का जो नियम बनाया था ,उसके अनुसार तीन स्लैब में मीसा वंदियों को सम्मान निघि राशी मिलती थी ।लेकिन बर्ष2018मे जैसे ही प्रदेश में काग्रेस की सरकार आई सम्माननिधि पर रोक लगा दी गई।बताया गया है कि प्रदेश में मीसा वंदियों की संख्या 300है ।उनको जेल में विताये अवधि के अनुसार सम्मान राशी मिलता था ।6माह से अधिक अवधि तक जेल मे रहने वालों को प्रतिमाह 25हजार,3से6माह तक के कैदी को .15हजार तथा 1दिन से3माह तक जेल में रहने वालो को 10हजार स्पये प्रतिमाह मिलते थे।मीसा वंदियों के मृत्यू हो जाने पर उनकी पत्नी को पेंशनराशि की आधी रकम देने की व्यवस्था थी।
     इघर लोकतंत्र सेनानी संघ नामक संगठन के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष तथा भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता र्साच्चदानंद उपासने ने सरकार के इस फैसले को अलोकतात्रिक करार  दिया है।एक अन्य बयान में मीसावंदी सर्वश्रीजागेश्वर प्रसाद,डॉ दशरथ निषाद,ईश्वर बघेल,विजय सेन ,दशरथ वर्मा,महेन्द्र चन्द्राकर,दुलीचंद वर्मा,मनहरण टिकरिया आदि ने सरकार के फैसले की निंदा करते हुए इसे बदले की भावना करार दिया है। जबाब में कांग्रेस ने पूर्व भाजपा सरकार को घेरते हुएमहामंत्री व प्रवक्ता शैलेन्द्र नितिन त्रिवेदी ने कहा कि रमन सरकार कोग़रीब,किसान,मजदूरों के बजाय मीसाबंदियों की चिंता रही। सरकारी खजाने का पैसा विकास कायों के बदले संघ विचारघारा के पोषण में लगाकर दुरुपयोग किया ।
*बुघवार मल्टीमीडिया नेटवर्क